मैं आई हूँ ।
मैं तुमसे मिलने आई हूँ! तुम्हारे
चेहरे की रौनक बढ़ाने आई हूँ!,
तुम्हारे वज़ूद को बनाने और
तुम्हारे व्यक्तित्व को संवारने
आई हूँ!यदि उदासी ने घेरा हो
तुम्हें तो तुम्हारा वक्त बदलने आई हूँ !
मैं विवादों को संवादों में और वादों
को दृढ़ इरादों में बदलने आई हूँ!टूटे हुए
मकानों की बुनियाद को मज़बूत करने और
नीव भरने आई हूँ !मैं तुम्हें कल्पना की दुनिया
से वास्तविकता में लाने आई हूँ ।
बस इतना जान लो कि मैं आई हूँ ।।
-✍🏻पूनम ✍🏻✍🏻
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