संगम


खुद को जैसी हो 

वैसी स्वीकार करो ।

तुम ही सहनशक्ति हो 

और मरहम भी ।

संतुष्टि हो और संगम भी ।

घायल हो और घातक भी ।

विश्व और सर्वव्यापक भी ।

निष्ठा और संस्थापक भी ।

होली भी दिवाली भी ।

मेहनत और ताली भी ।

मात पिता के चेहरे की लाली भी बंजर भूमि और हरियाली भी ।

             -✍️ पूनम ✍️✍️


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