कहना और सुनना


तुम कहो और मैं सुनती रहूँ,

ये है मजबूरी मेरी ,

मैं कहु और तुम सुनो 

ये ही तो कम करता है 

हमारे बीच की दूरी ।

स्त्री को क्या चाहिए?

कोई सुनने वाला 

सुनाने का हक है तुम्हें,

तो सुनने का हक किसे 

दूँ बताओ जरा???

         - ✍️पूनम ✍️✍️

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